डॉ. हेमलता श्रीवास्तव का निधन: करोड़ों की संपत्ति पर गहराया विवाद, धोखाधड़ी के आरोपों की जांच शुरू
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Dr. Hemlata Shrivastava Death
गिफ्ट डीड के जरिए संपत्ति हस्तांतरण पर सवाल.
पोस्टमार्टम और राजस्व दस्तावेजों की जांच जारी.
Jabalpur / जबलपुर की सेवानिवृत्त वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव के निधन के बाद शहर में शोक की लहर है, लेकिन उनके जाने के साथ ही करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर गंभीर विवाद भी सामने आ गया है। जिला अस्पताल में लंबे समय तक सेवा देने वाली डॉ. श्रीवास्तव का मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज चल रहा था। वह कुछ समय तक वेंटिलेटर पर रहीं और वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के तुरंत बाद उनकी चल-अचल संपत्ति के स्वामित्व को लेकर कानूनी और प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है।
विवाद का केंद्र उनकी कीमती जमीन और मकान हैं। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले एक चिकित्सक दंपत्ति डॉ. सुमित जैन और डॉ. प्राची जैन ने कथित तौर पर ‘गिफ्ट डीड’ के माध्यम से संपत्ति का बड़ा हिस्सा अपने नाम करवा लिया। वहीं, गायत्री मंदिर ट्रस्ट ने भी संपत्ति के आधे हिस्से पर दावा पेश किया है। मामला तब और गंभीर हो गया जब डॉ. श्रीवास्तव का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें अस्पताल के कागजों पर हस्ताक्षर कराने के बहाने भ्रमित किया गया।
उन्होंने यह भी कहा था कि वह अपनी 750 वर्ग फीट जमीन अपने दिवंगत पति और पुत्र की स्मृति में स्मारक बनाने के लिए सुरक्षित रखना चाहती थीं, लेकिन कथित रूप से 11,000 वर्ग फीट जमीन पर कब्जा कर लिया गया। इन आरोपों ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है।
प्रशासनिक जांच में कुछ संदिग्ध पहलू सामने आए हैं। यह भी आशंका गहरी हो गई कि दस्तावेजों पर निशान उस समय लिए गए जब वह पूरी तरह सचेत नहीं थीं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया है, ताकि मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सके।
बताया जा रहा है कि पहले भी उन्होंने अपनी बहन और जीजा पर आरोप लगाए थे। अब आशंका है कि अन्य पक्ष, जिनमें कुछ बिल्डर भी शामिल हो सकते हैं, इस संपत्ति पर दावा कर सकते हैं। राजस्व विभाग जमीन की रजिस्ट्री और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहा है। एसडीएम न्यायालय और कलेक्टर कार्यालय पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि डॉक्टर के निधन के बावजूद जांच प्रक्रिया जारी रहेगी और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए वास्तविक स्वामित्व और वैध उत्तराधिकारियों का निर्धारण किया जाएगा। यदि कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी सामने नहीं आता, तो संपत्ति को नगर निगम के अधीन करने पर भी विचार किया जा सकता है।
एक ओर शहर उनकी सेवाओं को याद कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यह मामला इस सवाल को जन्म देता है कि क्या उनकी असहाय स्थिति का फायदा उठाया गया। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष ही इस जटिल विवाद की सच्चाई सामने लाएंगे।